ईद अल-अज़हा
ईद-ए-कुर्बां का मतलब है बलिदान की भावना। अरबी में 'क़र्ब' नजदीकी या बहुत पास रहने को कहते हैं मतलब इस मौके पर अल्लाह् इंसान के बहुत करीब हो जाता है। कुर्बानी उस पशु के जि़बह करने को कहते हैं जिसे 10, 11, 12 या 13 जि़लहिज्ज (हज का महीना) को खुदा को खुश करने के लिए ज़िबिह किया जाता है। कुरान में लिखा है: हमने तुम्हें हौज़-ए-क़ौसा दिया तो तुम अपने अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो। बकरा ईद में लोगों को एक बकरे की कुर्बानी दे और एक बकरे का भी पालन करें। इस ईद को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे ईदुल अज़हा ईद अल-अज़हा ईद उल-अज़हा ईद अल-अधा ईद उल ज़ुहा त्याग का उत्थान [ संपादित करें ] कुरबानी यानि ईद उल अजहा का त्यौहार हिजरी के आखिरी महीने ज़ु अल-हज्जा के १० वें दिन मनाते हैं। पूरी दुनिया से मुसलमान इस महीने में मक्का सऊदी अरब में एकत्र होकर हज मनाते है। वास्तव में यह हज की एक अंशीय अदायगी और मुसलमानों के भाव का दिन है। दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज करता है बाकी मुसलमानों के अंतरराष्ट्रीय भाव का दिन बन जात...



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