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GAZAL ग़ज़ल

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 किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई                                                          यहाँ से जाने वाला लौट कर कोई नहीं आया                                                                       मैं रोता रह गया लेकिन न वापस जा के माँ आई अधूरे रास्ते से लौटना अच्छा नहीं होता बुलाने के लिए दुनिया भी आई तो कहाँ आई                                                    ...

GEET गीत (गाने)

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 ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझ से मेरी जवानी मगर मुझ को लौटा दो बचपन का सावन वो काग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी                                                                                                                   मोहल्ले की सब से पुरानी निशानी                                                          वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी                                                       ...

Shayari Hindi

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 और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा                                                   माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं                                                             तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा                                                      हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन                             ...

Shayari hindi and english

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Meri maa meri taaqat hai, Unke bina zindagi adhuri si lagti hai, Unki duaon mein itna asar hai, Har mushkil bhi aasaan lagti hai, Duniya saath de ya na de, Maa har haal mein saath khadi milti hai...!! रंग से गोरी नहीं थी.. पर खूबसूरत थी.. ज्यादा लंबी भी नहीं थी.....  पर मेरे लिए सही थी...प्यार जताने वाली नहीं थी...  पर मेरे कदमों के साथ चलती थी... मंदिर मस्जिद अंदर जाने से मना करती थी... पर बाहर मेरा इंतजार करती थी.... कहीं भी जाऊँ मेरे लिए रुक जाती थी.... वो जैसी भी थी मेरी चप्पल थी.. पता नहीं कौन उठाकर ले गया... पहन के पाँव में मज़बूरी, घर की चौखट छोड़ आया हूँ, जो अपनी आँख के सपने थे, वो पीछे ही तोड़ आया हूँ... कहाँ ये शौक था मेरा कि अपनों से मैं दूर रहूँ, बस ज़िम्मेदारी निभाने के लिए, अपना शहर छोड़ आया हूँ...!! रूह काँप गई उस दिन, जिस दिन माँ ने पास बैठाकर,  मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए कहा-मैं पूरी जिंदगी तेरे साथ नहीं रह पाऊँगी बेटा... उसकी आवाज काँप रही थी,  और मेरी साँसें थम सी गई थीं वो बोली-अपना ध्यान रखना सीख ले,  दुनिया बहुत बेरहम है, माँ हर वक्त...

Motivational Quotes

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  यदि आपने किसी भी कार्य के लिए ईमानदारी से संघर्ष किया है,  तो परिणाम  चाहे सफलता हो या असफलता, वास्तव में संघर्ष की भावना ही अपने आप में एक सफलता है। मंजिल उन्हीं को मिलती है , जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है । भले दुनिया से थोड़ा पीछे रहो,लेकिन तैयारी मजबूत हो, तो तुम कभी भी आगे निकल सकते हो । परिंदों को मंजिल मिलेगी यकीनन यह फैले हुए उनके पर बोलते हैं, अक्सर वह लोग खामोश रहते हैं जमाने में, जिनके हुनर बोलते हैं ।   जीवन में शांति चाहते हैं तो दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है  खुद को बदल लें।  क्योंकि पुरी दुनिया में कारपेट बिछाने से  खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है।  समझनी है जिंदगी तो पिछे देखो,  जीनी है जिंदगी तो आगे देखो…   ज़िंदगी का सफ़र मानो तो मौज है  वरना समस्या तो रोज है।  किसी दौड़ के लिए दौड़ना जरूरी नहीं है,  छोटे-छोटे कदम Important हैं,    क्योंकि छोटे-छोटे कदमों से ही दौड़ पूरी हो जाती है,  इसी तरह छोटे-छोटे Step से हम भी अपने जीवन...

ईद अल-अज़हा

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  ईद-ए-कुर्बां का मतलब है बलिदान की भावना। अरबी में 'क़र्ब' नजदीकी या बहुत पास रहने को कहते हैं मतलब इस मौके पर अल्लाह् इंसान के बहुत करीब हो जाता है। कुर्बानी उस पशु के जि़बह करने को कहते हैं जिसे 10, 11, 12 या 13 जि़लहिज्ज (हज का महीना) को खुदा को खुश करने के लिए ज़िबिह किया जाता है। कुरान में लिखा है: हमने तुम्हें हौज़-ए-क़ौसा दिया तो तुम अपने अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो। बकरा ईद में लोगों को एक बकरे की कुर्बानी दे और एक बकरे का भी पालन करें। इस ईद को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे ईदुल अज़हा ईद अल-अज़हा ईद उल-अज़हा ईद अल-अधा ईद उल ज़ुहा त्याग का उत्थान [ संपादित करें ] कुरबानी यानि ईद उल अजहा का त्यौहार  हिजरी  के आखिरी महीने  ज़ु अल-हज्जा  के १० वें दिन मनाते हैं। पूरी दुनिया से मुसलमान इस महीने में  मक्का   सऊदी अरब  में एकत्र होकर  हज  मनाते है। वास्तव में यह हज की एक अंशीय अदायगी और मुसलमानों के भाव का दिन है। दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज करता है बाकी मुसलमानों के अंतरराष्ट्रीय भाव का दिन बन जात...